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रात की जनसभा में उमड़ा जनसैलाब
किसान-मज़दूर का बेटा, समाजसेवी और एडवोकेट

हर्षछिकारा

“मेरा संघर्ष ही मेरा परिचय है”

हर्ष छिकारा, केसरिया पगड़ी में
जहाँ उम्मीद टूटती है, वहीं से हमारी शुरुआत होती है
2012 से 2026 तक

हर संख्या के पीछे एक चेहरा

किसी बेटी की मुस्कान, किसी माँ की दुआ, किसी मरीज़ की लौटती साँस, किसी किसान का मिला हक़। ये आँकड़े नहीं, आशीर्वाद हैं।

बेटी का कन्यादान
1500+ग़रीब बेटियों की शादी अपने हाथों से। टीम द्वारा मिलकर करवाए गए विवाह कई हज़ार (लगभग 5000+)।
₹100 करोड़+2012 से अब तक भाईचारे के सहयोग से ज़रूरतमंदों तक पहुँचाई गई मदद
250+ग़रीब बहनों का भाई बनकर भात भरा, जिनके न भाई था, न पिता
परिवर्तन रैली का पंडाल
14,761मत, गोहाना विधानसभा 2024: बिना दल, केवल लगभग 40 दिन का अभियान
200+जन-आंदोलनों में अग्रणी भूमिका: किसान, जवान, छात्र और गाँवों का हक़
1.2 लाख+ज़मीनी कार्यकर्ता, हरियाणा और राजस्थान में
53 लाख+सोशल मीडिया फ़ॉलोअर्स: फ़ेसबुक 31.6 लाख+, इंस्टाग्राम 14.5 लाख+, यूट्यूब 7.5 लाख+

सेवा-कार्यों के आँकड़े टीम हर्ष छिकारा के रिकॉर्ड से; चुनाव आँकड़े भारत निर्वाचन आयोग से। 5000+ बेसहारा परिवारों का सहारा; कोरोना-काल में 5 लाख+ ज़रूरतमंदों तक राहत।

कहानी

एक कहानी, जो मिट्टी से शुरू हुई

झज्जर ज़िले के गाँव लडरावण में, 8 फ़रवरी 1989 को एक साधारण किसान-मज़दूर परिवार में एक बच्चे ने जन्म लिया। 7 बरस की आयु में माँ के निधन के बाद ज़िम्मेदारी का बोझ कंधों पर लिया, और चौदह बरस की उम्र में वह पिता के साथ ₹75 की दिहाड़ी पर ट्रकों से रोड़ी उतारने लगा।

भूख का दर्द वही समझता है, जिसने उसे सहा हो। 2012 में उसने शादियों का बचा भोजन भूखे बच्चों तक पहुँचाने से शुरुआत की, और 2016 में सोशल मीडिया पर लाइव आकर ज़रूरतमंदों के लिए मदद माँगना शुरू किया। लोगों ने ताने दिए, पर हर वीडियो के साथ किसी बेटी की डोली उठी, किसी बहन के आँगन में भात पहुँचा।

आज वही बच्चा हर्ष छिकारा है: बेटियों का भाई, किसानों के धरनों में सबसे आगे खड़ा बेटा, और लाखों लोगों के भरोसे का नाम।

सारी चमक पसीने की है जनाब, विरासत में हमें कोई तिजोरी नहीं मिली।हर्ष छिकारा, अक्टूबर 2021
पूरी कहानी पढ़ें
  1. 1₹75 की दिहाड़ी पर ट्रकों से रोड़ी उतारना
  2. 27 बरस की आयु में ज़िम्मेदारी का बोझ
  3. 3फ़ीस के पैसे तक जुटाना मुश्किल
  4. 4शादियों का बचा भोजन बाँटती छोटी-सी टीम
  5. 5ताने: “दिखावा कर रहा है”
  6. 6न कोई पहचान, न कोई सिफ़ारिश
  1. 1सैकड़ों लोगों को रोज़गार
  2. 2हज़ारों माताओं-बहनों का आशीर्वाद
  3. 3एडवोकेट: एलएल.बी. के बाद क़ानून का पेशा
  4. 41.2 लाख+ ज़मीनी कार्यकर्ताओं का परिवार
  5. 553 लाख+ सोशल मीडिया फ़ॉलोअर्स का परिवार
  6. 614,761 मतों का जनादेश (2024)

“अब” दबाकर देखिए, संघर्ष के हर पड़ाव ने क्या बनाया।

सेवा ही संकल्प

कोई गरीब भूखा न सोए, कोई बेटी बिना डोली न रहे

हर ज़रूरत पर एक ही तरीका: मौक़े पर पहुँचना, सोशल मीडिया पर अपील, भाईचारे का दान सीधे परिवार तक, और पूरा हिसाब सार्वजनिक।

जनसैलाब

जहाँ टेंट छोटा पड़ जाए

गोहाना में जहाँ टेंट छोटा पड़ जाए, समझ लो हर्ष छिकारा आ रहा है।हर्ष छिकारा, 28 सितंबर 2024
परिवर्तन रैली: 17 बीघे का पंडाल भी छोटा पड़ा
3 अक्टूबर 2024, गोहानापरिवर्तन रैली: 17 बीघे का पंडाल भी छोटा पड़ा
भगत सिंह जयंती पर देर रात तक डटा जनसमूह
28 सितंबर 2024, जुआँभगत सिंह जयंती पर देर रात तक डटा जनसमूह
नामांकन रोड-शो में फूलों की बरसात
11 सितंबर 2024, गोहानानामांकन रोड-शो में फूलों की बरसात
36 बिरादरी की महापंचायत
13 जुलाई 2025, अनंगपुर36 बिरादरी की महापंचायत
गाँव का जनसैलाब
17 सितंबर 2024, सरगथलगाँव का जनसैलाब
भाईचारा महापंचायत
26 अगस्त 2023, मेवातभाईचारा महापंचायत
आधी रात को भगत सिंह जयंती पर जुड़ा हुजूम
28 सितंबर 2021, जमालपुरआधी रात को भगत सिंह जयंती पर जुड़ा हुजूम
“हर किसान भगत सिंह” जन-क्रांति रैली
23 मार्च 2026, पिपली“हर किसान भगत सिंह” जन-क्रांति रैली
सभी रैलियाँ और महापंचायतें
जनादेश 2024

40 दिन, 14,761 विश्वास

न कोई राजनीतिक दल, न पुरानी तैयारी। गोहाना की जनता और सरदारी के आग्रह पर लगभग 40 दिन का जन-अभियान, और सभी निर्दलीय प्रत्याशियों में सबसे ज़्यादा मत।

11.29%मत-प्रतिशत, हर 9 में से 1 मतदाता
10,429जीत का अंतर, हर्ष छिकारा के मतों से कम
चुनाव की पूरी कहानी

गोहाना (32) विधानसभा, मतगणना 8 अक्टूबर 2024। स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग।

संघर्ष

हक़ की हर लड़ाई में सबसे आगे

200+ जन-आंदोलनों में शांति और संयम के साथ किसानों, जवानों, छात्रों और गाँवों की आवाज़ सरकार तक।

2012

जन-लोकपाल आंदोलन में सक्रिय भूमिका; शादियों के बचे भोजन से भूखे बच्चों की सेवा।

2016

जाट आरक्षण आंदोलन में शांतिपूर्ण नेतृत्व; गिरफ़्तार साथियों के परिवारों के लिए ₹8 लाख।

2019

पुलवामा के बाद 40 शहर बंद का अभियान; टप्पल की मासूम के लिए जंतर-मंतर पर 10 बार आंदोलन।

2020–21

कृषि क़ानूनों के विरुद्ध दिल्ली बॉर्डर पर डटे; तीनों क़ानून वापस।

2022

अग्निपथ के विरोध में जींद महापंचायत और तालू से पैदल यात्रा।

2023

जंतर-मंतर पर पहलवानों का साथ; मेवात में भाईचारा महापंचायत।

2025

बेटी मनीषा के लिए न्याय की आवाज़; HAU के छात्रों के लिए महापंचायत।

2026

चानौत में 61 दिन का पेयजल आंदोलन और जीत; पिपली की जन-क्रांति रैली।

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मीडिया

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अमर उजाला, दैनिक भास्कर, हरिभूमि से लेकर हैदराबाद के डेली हिंदी मिलाप तक। किसी भी कतरन पर क्लिक करके पढ़ें।

अमर उजाला, 26 अक्टूबर 2020दैनिक भास्कर, 12 सितंबर 2024डेली हिंदी मिलाप, हैदराबाद, 15 सितंबर 2024दैनिक भास्कर, 10 अक्टूबर 2020हरिभूमि, 2 अप्रैल 2023पानीपत की ख़बरदैनिक भास्कर, जून 2023मेवात, जून 2024दैनिक भास्कर, गोहाना, 4 अक्टूबर 2024हरिभूमि, पानीपतदैनिक भास्कर, 19 जून 2026एएम-पीएम न्यूज़, 10 सितंबर 2021
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