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माँ गंगा से गौ-माता तक
नदी, पानी, पेड़ और बेज़ुबान जीव: प्रकृति की सेवा भी उतनी ही ज़रूरी है जितनी इंसान की।
माँ गंगा
ख़ून से लिखे पत्र, गंगा के नाम
माँ गंगा की सफ़ाई के आंदोलन में 3500+ लोगों ने अपने ख़ून से पत्र लिखे, और संतों के साथ मिलकर माँ गंगा और प्रकृति की रक्षा की आवाज़ उठी।
3500+लोगों ने ख़ून से पत्र लिखे
पानी
हर बूँद का हक़
चानौत का पेयजल आंदोलन61 दिन का धरना; 15 जुलाई 2026 को समझौता, अमृत-2 योजना में गाँव के लिए अलग पाइपलाइन।किसान
जलभराव में राहतजुआँ और धनाना की पंचायतों को पानी निकासी के लिए ₹51,000 (सितंबर 2025)।किसान
जल-सेवागर्मियों में राहगीरों के लिए ठंडे पानी के मटके (2018 से)।
गंदे पानी की आवाज़धनाना में गंदे पानी से फैलते चर्म रोग का मुद्दा उठाया।
गौ-सेवा
बेज़ुबानों की सँभाल
गौ सेवा सदन में 125 गौमाताओं की सँभाल की जाती रही है; दूध, गोमूत्र और गोबर निःशुल्क, कोई पर्ची नहीं। हांसी में दुर्घटनाओं में घायल गौवंश के लिए गौशाला की नींव रखी गई, और गौशाला के लिए ज़मीन दान की गई।
हिंदवान और खिड़वाली जैसी गौशालाओं को सहयोग, देसी गाय की नस्ल सुधार में मदद, और सर्दियों में गौशालाओं तक कंबल।
सड़क पर घूमने वाली गौमाता की डिलीवरी, मार्च 2020
गौ सेवा सदन में बछड़े के साथ
गौमाता की डिलीवरी स्वयं करवाई, अप्रैल 2020
गौवंश के बीच
जुआँ गाँव की पंचायत को खागड़ दान, 2025
सिसाना: रक्तदान शिविर व भंडारा, अप्रैल 2023
धनौरी गौशाला, 2020
हादसे में घायल आवारा गौमाता की सेवा, जो फिर ब्याई, मई 2020
गौशाला की “भूरी”, जून 2020
कोरोना काल में गौशाला से दूध निःशुल्क, मार्च 2020
अपनी गौशाला में, अप्रैल 2021
प्रकृति और गौ-सेवा
प्रकृति और गौ-सेवा
प्रकृति और गौ-सेवा
प्रकृति और गौ-सेवावीडियो





