जड़ें, जिन पर पेड़ खड़ा है
लडरावण में जन्म, जुआँ की मिट्टी, मज़दूरी के साथ पढ़ाई और एलएल.बी.: एक साधारण परिवार की असाधारण पृष्ठभूमि।
परिचय-पत्र
जन्म, जड़ें, पढ़ाई और पेशा: सारी बुनियादी जानकारी एक जगह। शिक्षा और पिता का नाम 2024 के चुनावी शपथ-पत्र के अनुसार।

- नाम
- हर्ष छिकारा
- जन्मतिथि
- 8 फ़रवरी 1989
- जन्मस्थान
- गाँव लडरावण, बहादुरगढ़ (झज्जर)
- पैतृक गाँव
- जुआँ, ज़िला सोनीपत
- पिता
- श्री देविंदर कुमार
- शिक्षा
- एलएल.बी., साबरमती विश्वविद्यालय, अहमदाबाद (2019–22)
- पेशा
- समाजसेवी, अधिवक्ता
- संस्था
- हर्ष छिकारा जन सेवा ट्रस्ट
- निवास
- सेक्टर 23, सोनीपत, हरियाणा
लडरावण और जुआँ
जन्म झज्जर ज़िले के लडरावण (बहादुरगढ़) में हुआ, और परिवार की जड़ें सोनीपत ज़िले के गाँव जुआँ में हैं। दोनों गाँवों ने उन्हें अपना बेटा माना।
अगस्त 2024 में जन्मभूमि लडरावण में 16–17 गाँवों की सरदारी ने पगड़ी पहनाकर आशीर्वाद दिया। सितंबर 2024 में जुआँ में भगत सिंह जयंती पर देर रात तक जनसभा हुई, और सितंबर 2025 में जलभराव के समय उन्होंने जुआँ और धनाना के खेतों का दौरा कर पानी निकासी के लिए दोनों पंचायतों को ₹51,000 दिए।
संघर्ष ही पाठशाला
7 बरस की आयु में माँ के निधन के बाद ज़िम्मेदारी का बोझ कंधों पर लिया। पिता के साथ मज़दूरी की, ज़मीन बिकती देखी, और इसी बीच पढ़ाई नहीं छोड़ी: गाँव के सरकारी स्कूल से मैट्रिक, बहादुरगढ़ से सीनियर सेकेंडरी, फिर स्नातक और एलएल.बी.।
कलाकार से समाजसेवी
हरियाणवी कलाकार के रूप में पहचान बनी, फिर दिसंबर 2016 से सोशल मीडिया सेवा का माध्यम बना। आज फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर 53 लाख+ लोगों का परिवार है।
गुरु और मार्गदर्शक
मुख्य कुश्ती कोच राजसिंह छिकारा, जिन्होंने 2021 में लडरावण की राज्य कुश्ती प्रतियोगिता में पगड़ी बाँधी।
अमित चौधरी, जिन्होंने स्टेज पर चढ़ना और लोगों के बीच बोलना सिखाया।
भरतपुर के किसान नेता नेम सिंह फौजदार, जिनसे इतिहास और बुज़ुर्गों का मान सीखा।
हर्ष छिकारा जन सेवा ट्रस्ट
सेवा-कार्यों को संस्था का रूप देने के लिए ट्रस्ट बना। यह भारत सरकार के NGO दर्पण पोर्टल पर शिक्षा, बुज़ुर्ग, स्वास्थ्य और मानवाधिकार जैसे क्षेत्रों में पंजीकृत है।


